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Prannath Vani | Mahamati Prannath | Pranami Sampraday | Daily Status

Prannath Vani Status - यहाँ आपको प्रणामी सम्प्रदाय के प्रवर्तक महामति प्राणनाथ जी की 1000 से भी अधिक वाणी मिलेंगी जिन्हें Daily Status के रूप में परिवर्तित किया गया है। ये Daily Status Hindi तथा English में हैं। आप इन्हें प्रतिदिन लोगों के साथ Share कर सकते हैं।  

महामति प्राणनाथ द्वारा रचित वाणी - श्री प्राणनाथ वाणी -  


पहले अपने आप को पहचानो , स्वयं को पहचाने बिना परब्रह्म परमात्मा को कौन जान सकता है । It is necessary to recognise your own - sell , without this the Supreme Lord cannot be realised . - महामति प्राणनाथ

मनुष्य जीवन अखण्ड फल प्राप्ति हेतु है , इसे व्यर्थ में मत गँवाओ । The human life is meant for achieving the cternity ; do not waste it in worthless activities . - Mahamati Prannath

अन्दर निर्मल नहीं है , तो केवल बाहर के स्नान से परमात्मा नहीं मिलेंगे । If your inner - self is not clean and pure , mere hy bathing the physical body the Lord will not be realised . - महामति प्राणनाथ

बाहर जैसा दिखते हैं , ऐसे ही दिल से भी हों , तो परमात्मा उसके साथ रहेंगे । If the external appearance is similar to the inner sell , the Lord will always be there . - Mahamati Prannath  

krishna pranami mantra Mahamati Prannath  / Prannath Vani -  


तुम स्वयं उनसे दूर हो रहे हो , परमात्मा तुमसे दूर नहीं हैं । You yourself are keeping away from the Lord : He is not away from you . - महामति प्राणनाथ  

Shri Prannath ji Photo Status-  

Prannath Vani | Mahamati Prannath | Pranami Sampraday | Daily Status





परमात्मा और अपने आप के बीच माया का पर्दा स्वयं तुमने ही डाला The curtain of delusion between the Lord and yourself is your own creation. - Mahamati Prannath  



जब तक दिल को नहीं साधोगे , परमात्मा नहीं मिलेंगे । Until you have control over your own mind , He shall not be attainable.  - महामति प्राणनाथ  

Prannath Vani -  



परमात्मा को पीठ देकर संसार के रंग में मत रंगो । By ignoring the Almighty do not get engaged in the worldly activities . - Mahamati Prannath  



दिन रात युगलस्वरूप श्री राजश्यामा जी के चरणों को ग्रहण करो , इसी से निर्मल बनोगे । Always remain attached with the sacred feet of the Divine Couple ( Shri Raj - Shyama Ti ) , you will get purified by it .  - महामति प्राणनाथ  



मोह माया के नरक से छूटना हो , तो परमात्मा का भजन करो । In order to get relief from the hell of the delusive world , pray to the Lord .  - Mahamati Prannath  

Prannath Vani -  


परमात्मा के सम्मुख हो जाओ , यही ब्रह्मसृष्टि की रीत है । Always keep your self before the Lord ; this is the practice of a divine soul . - महामति प्राणनाथ  

Mahamati Prannath sampraday name - Shri Krishna Pranami Nijanand Sampraday

परमात्मा के साथ सत्य व्यवहार करनेवाला व्यक्ति ही सच्चा सुन्दरसाथ One , who is virtuous to the Lord , qualifies to be among the group of divine souls . - Mahamati Prannath

Prannath Vani -  

अवगुण को छोड़कर गुण को ग्रहण करो । Inculcate the noble attributes and renounce immoral deeds . - महामति प्राणनाथ

माया से हारने पर ही भक्ति मार्ग में विजयी होते हैं । On overcoming the attractions of the worldly affairs one can achieve success in path of devotion . - Mahamati Prannath

सोचो , परमात्मा बाल्यकाल से बुढ़ापे तक तुम्हारे सिर पर खड़े हैं ।। Always keep in mind that the Lord is observing you from the childhood till the old age . - महामति प्राणनाथ

कोई तुमको कष्ट देता है , तुम उसका भी भला चाहो । Wish welfare of those even though they trouble you . - Mahamati Prannath

pranami religion

कभी पीछे की ओर न देखो , न ही किसी की परवाह करो , बस , परमधाम को याद करो । Neither look backwards , nor care for others , keep yourself focussed on the Supreme Abode . - महामति प्राणनाथ  

Prannath Vani -  

कभी पीछे की ओर न देखो , न ही किसी की परवाह करो , बस , परमधाम को याद करो । Neither look backwards , nor care for others , keep yourself focussed on the Supreme Abode . - Mahamati Prannath

हम परमात्मा के हुकुम तले हैं , हुकुम उनके ही हाथ में है । We are under Lord's command , all directives are delivered by Him .  - महामति प्राणनाथ

संसार में हमारा कुछ नहीं चलता , परमात्मा जैसा चाहेंगे , वैसा ही होगा । In this world nothing occurs according to our desires , as the Lord wishes so it happens .  - Mahamati Prannath

हमने अनेक अवगुण किए , दुष्टाई की , फिर भी परमात्मा ने अपना गुण नहीं छोड़ा । We performed many misdeeds , created troubles to others , but the Lord always remained merciful to us . - महामति प्राणनाथ  

Prannath Vani -  

हे परमात्मा ! चाहे प्रसन्न रखो , चाहे दु : खी ; चाहे पवित्र बनाओ , चाहे गुनहगार , हम आपके ही हैं । O Lord ! You may keep us happy or sad , cither make us pure or sinful . we belong to only you . - Mahamati Prannath

Mahamti Prannath - He Parmatma! Aap Gun ...

हे परमात्मा ! आप गुण बरसाते रहें , हमारी तरह हमें भूला न दें । O Lord ! You keep on showering your blessings , but like us do not become forgetful to us .  - महामति प्राणनाथ

परमात्मा सदा सुख के दाता हैं , उनसे कुछ माँगना नहीं पड़ता । Lord always blesses us with pleasures , asking anything from him is not required. - Mahamati Prannath

Prannath Vani -  

परमात्मा की कृपा , शिक्षा एवं रक्षा से ही हम माया से छुटकारा पाएँगे । Only with Lord's kindness , edifications and protection we can get rid of illusive matters . - महामति प्राणनाथ

परमात्मा कृपा करते हैं , तो हमारे शत्रु का बल क्षय हो जाता है । With mercy of the Lord the strength of our foes gets destroyed . - Mahamati Prannath

परमात्मा की कृपा से बिगड़े काम सुधर जाते हैं , मनोवांछित फल मिलते हैं । With Lord's blessings the spoiled matters get sorted out , the desires are fulfilled .  - महामति प्राणनाथ

Prannath Vani -  

हे सुन्दरसाथजी ! मिलकर सुनो , जागो , विचार करो , सद्गुरु को पहचानो । O my companions , together you listen , gel awakened , ponder over it and recognise your Sadguru . - Mahamati Prannath

आत्मा है , तभी बोलते तथा चलते हैं , फिर भी आत्मा को नहीं पहचानते । The soul is there , that is why we speak and move , but still we do not comprehend the existence of the soul .  - महामति प्राणनाथ

अपने अन्दर खोजो , तभी परब्रह्म परमात्मा मिलेंगे । Search your inner self , only then you can realise the Lord .  - Mahamati Prannath

Prannath Vani -  


बिन्दुरूपी शरीर में सिन्धुरूपी आत्मा समाई हुई है । In this point sized physical body , ocean like vast soul resides . - महामति प्राणनाथ  


आत्मा बाहर - भीतर नहीं , अन्तर में बैठी हुई है । The soul is neither inside nor outside , it is there in the heart .  - Mahamati Prannath  


सत्य स्वप्न को देख सकता है , स्वप्न सत्य को नहीं । The truth can visualise the dream but vice versa is not possible . - महामति प्राणनाथ  


मृगजल से यदि प्यास बुझे , तो गुरु बिना भी जीव पार पा सकता है । If the thirst could be quenched by water from an illusive water pond ( mirage ) , then the soul can also cross this worldly ocean without a guiding master .  - Mahamati Prannath  


Sachche Sadguru hi maya.. Nijanand Sampraday Prannath Vani -  

सच्चे सद्गुरु ही माया और ब्रह्म की पहचान करा सकते हैं । Only a true master ( Sadguru ) can enable you to distinguish between the illusive world and the Flemal Lord . - महामति प्राणनाथ  


लोग मेरी मेरी करते रहते हैं , जब कि एक पल का भरोसा नहीं है । The worldly people are always involved in selfish motives while this life is transitory . - Mahamati Prannath


स्वयं भजन भक्ति नहीं करते , परमात्मा को दोष देते हैं । They neither pray nor worship the Lord themselves , but keep blaming Him . - महामति प्राणनाथ


Prannath Vani -  

जीव स्वयं ही कर्म का बन्धन बाँध रहा है , कर्म को दोष देकर रोता The soul keeps tying herself in worldly affairs , ultimately weeps by accusing the actions . - Mahamati Prannath  


जिसका नाम , स्थान एवं नाम नहीं , ऐसा निराकार , परमात्मा नहीं हो सकता । One who is not having a name or a native place , such formless cannot be considered to be the Lord .  - महामति प्राणनाथ  


परमात्मा सत् , चिद् , आनन्दस्वरूप हैं । The Lord comprises of truthfulness , divinity and ultimate bliss . - Mahamati Prannath  


Parmatma ne hi sagar .... Shri Krishna Pranami Dharm

परमात्मा ने ही सागर , पहाड़ , सूर्य , चन्द्र , नक्षत्र , ऋतु एवं संसार बनाया है । The Lord is the creator of oceans , mountains , sun , moon , planets , the seasons and this universe . - महामति प्राणनाथ


सद्गुरु वही हैं , जो अगम का गम करा दें , हद - बेहद समझाकर मन का भ्रम दूर करें । Sadguru is he who can make you comprehend the beyond : distinguish between this perishable and the imperishable Abode , thereby clarifying all doubts of mind . - Mahamati Prannath


Prannath Vani -  

गुरु वही है , जो अलख परमात्मा को लख - दिखा दे । Who can make us visualise the imperceptible Lord , can be taken as guru . - महामति प्राणनाथ


लोक लाज एवं मर्यादा त्याग कर ही ज्ञान की पदवी मिलती है । By forsaking worldly modesty and dignity , one can attain the distinction of true spiritual knowledge .  - Mahamati Prannath


लोग माया ममतारूपी छोटी आग बुझाकर , मान बड़ाईरूपी बड़ी आग लगा लेते हैं । By extinguishing the minor fire of desires and attachments , the people create bigger fires of self - esteem and egoistic admiration .  - महामति प्राणनाथ


मान , गुमान एवं ज्ञान के अभिमान को छोड़ो । Renounce the self - respect . ego and arogance of knowledge . - Mahamati Prannath


परब्रह्म परमात्मा पूर्ण एवं एक हैं , संसार के लोग अनेक परमेश्वर को मानते हैं । There is only one Supreme Lord , while the worldly people have belief in many forms of gods .  - महामति प्राणनाथ  


Koi Swaym ko parmatma ghoshit karte ... Devchandra ji maharaj

कोई स्वयं को परमात्मा घोषित करते हैं , कुछ उनके सेवक भी बनते हैं , यह अंधकार का खेल है । Sonie declare theniselves as god , some become his followers : this is the game of ignorance .  - Mahamati Prannath


तुम संसार के नाटक को देखकर पलभर में ब्रह्माण्ड लाँघकर परमधाम पहुँची । You must instantly reach the Supreme Abode after viewing momentary play of this universe . - महामति प्राणनाथ


वैष्णव उसी को कहा जाता है , जिसकी आत्मा निर्मल हो । One with pure and unblemished soul is called a true devotee ( Vaishnav ) . - Mahamati Prannath


Prannath Vani -  

जिसको परब्रह्म की पहचान हो जाती हैं , वह कभी नीच कर्म नहीं करता । One who realises identity of Supreme Lord , no more gets involved in misdeeds . - महामति प्राणनाथ


प्रेम से परमात्मा को भजो , सखी भाव से उन्हें प्राप्त करो । Pray to the Lord with love and attain Him with the conviction of a beloved companion . - Mahamati Prannath


जब आत्मा की दृष्टि परमात्मा से जुड़ जाती है , उसी को आत्म - निवेदन भक्ति कहा जाता है । When the sight of soul gets connected to the Lord , then it is known as the devotion of soul's submission . - महामति प्राणनाथ  


Sadguru Dhani shri Devchandra ji Maharaj - Prannath Vani -  

जिसका परब्रह्म से स्पर्श हो चुका है , वह बाहर के अस्पर्श का दिखावा नहीं रखता । One , who has established contact with the Lord , gets distracted from the outer world .  - Mahamati Prannath


परमात्मा में एकचित्त होने पर संसार की आशा और तृष्णा मिट जाती By merging oneself with the Lord , the desires and expectations from the world no longer persist .  - महामति प्राणनाथ


परमात्मा से प्रेम करों , संसार को असत् समझो । Love the Lord , consider world to be false . - Mahamati Prannath


प्रेम के बिना परमात्मा का सुख नहीं मिलता , भले ही अनेक आचरण करो । The pleasures of Lord cannot be realised without love , whatever else you may do . - महामति प्राणनाथ


सच्चे परमात्मा सच्ची भक्ति से ही मिल सकते हैं । Supreme Lord can be realised only with true devotion . - Mahamati Prannath


मुख से कहने से प्रेम उत्पन्न नहीं होता , प्रेम - बाण तो हृदय को द्रवित करता है । Love does not originate just by uttering it : the arrow of love makes the heart compassionate . - महामति प्राणनाथ


Prannath Vani -  

प्रेमी आत्मा आग , खड्ग , बाघ तथा नाग से भी नहीं डरती । The beloved soul is not scared of fire , spear , lion or the snake . - Mahamati Prannath


Premi Atma trigun se ... Shri Krishna Pranami Dharm

प्रेमी आत्मा त्रिगुण से रहित , अंग - इन्द्रिय से निवृत्त होती है । The soul in love is free from the three virtues and is no more under the influence of sensual and physical organs . - महामति प्राणनाथ


प्रेम पीकर मग्न न होना , यही प्रेमी आत्मा की परीक्षा है । Getting deeply absorbed in love and not losing senses , is the test for the true lover .  - Mahamati Prannath


संसार को देखो , यह खेल परमात्मा ने आपके लिए रचा है । Watch the world , this play has been created for you by the Lord . - महामति प्राणनाथ


Prannath Vani -  

भक्ति दु:ख में भी सुख का अनुभव कराती है । Even in grief the devotion provides feeling of relief . - Mahamati Prannath


अपने सद्गुरु से पूछो , संसार छोड़ने के पश्चात् आत्मा का घर कहाँ Enquire from your sadguru , where the soul dwells after leaving the world . - महामति प्राणनाथ


अपनी बड़ाई लाखों बार करो , परमेश्वर बनकर पूजाओ , फिर भी भव से पार पाना कठिन है । You may admire yourself millions of times and get worshipped like a god ; still it is difficult to cross the ocean Talse world .  - Mahamati Prannath


लोग बाहर के वेश में भूल जाते हैं , अन्दर की खोज नहीं करते । People get lost in outward appearances ; they do not scarch their inner self. - महामति प्राणनाथ


Bhavsagar aur Bhagwat ... Pranami Dharm

भवसागर और भागवत - दोनों को खोलने के लिए मात्र एक तारतमरूपी चाबी ही पर्याप्त है । To understand the ocean of this false world and Bhagwat , only the key of Tartam Mantra is adequate . - Mahamati Prannath


Prannath Vani -  

तुम कौन हो , कहाँ से आए , तुम्हारा घर कहाँ है ? श्री कृष्णजी को कैसे पाओगे , विचार करो । Who are you , where from you have come and where is your real home ? How will you comprehend Shri Krishna ? Ponder over all these .  - महामति प्राणनाथ


वैष्णव वही है , जो चार अन्त : करण एवं पाँच ज्ञानेन्द्रिय- इन नवों अंग को जगाता है । Pure soul ( vaishnav ) is one who awakens the four types of conscious Tiess and five senses - all these nine faculties .  - Mahamati Prannath


दु : ख मेरे लिए प्राण से भी प्रिय है , उसे मैं छोड़ नहीं सकता । Grief is dearer to me than life , I cannot leave it .  - महामति प्राणनाथ


Prannath Vani -  

दु : ख के बिना परमात्मा के चरणकमल कोई नहीं पा सकता । Without sufferings no one can attain sanctity of sacred feet the Lord . - Mahamati Prannath


दुःख हमारा आहार है , परन्तु यह दुःख औरों को खा जाता है । Grief is my diet , but these sufferings annihilate others . - महामति प्राणनाथ  


Dukh se parmatma milte hai ... प्राणनाथ का इतिहास

दु : ख से परमात्मा मिलते हैं , सुख से नहीं , अत : सुख को छोड़कर दु : ख का मार्ग चुनो । The grief takes us to the Lord , pleasure does not . So leave the enjoyments and chose the path of sufferings . - Mahamati Prannath


दु : ख से विरह उत्पन होता है और विरह से प्रेम , प्रेम ही परमात्मा से मिलाता है । The sorrows give rise to agony of separation , it further generates love and love leads to the Lord .  - महामति प्राणनाथ


जब कभी परमात्मा प्रसन्न होते हैं , साधक के जीवन में दुःख आता है । Whenever the Lord is pleased sufferings develop in the life of devotee . - Mahamati Prannath


संसार वाले साधक को पागल कहते हैं , साधक संसार वालों को । The worldly people consider a devotee to be an insane , while he takes the world to be mad . - महामति प्राणनाथ


Prannath Vani -  

साधु होकर चमत्कार दिखाना जुल्म है , दुनिया को पागल मत बनाओ ! For a saint display of miracles is tyranny , do not befool the world . - Mahamati Prannath  


Bhakti Marg me chalne balon ko .. प्राणनाथ मंदिर पन्ना

भक्ति मार्ग में चलनेवालों को लोक , वेद एवं कुल मर्यादा से ऊपर उठना होगा । Followers of path of devotion have to rise above the considerations of worldly people , Holy Scriptures and of caste status . - महामति प्राणनाथ


Prannath Vani -  

घर में रहो या वन में , सद्गुरु के बिना ज्ञान नहीं होगा । One may stay at home orina forest , without a spiritual guide ( Sadguru ) the true knowledge cannot be gained . - Mahamati Prannath


सुध आए बिना समय बिता जा रहा है , होश रखो । Without getting perception the time is passing away , be attentive . - महामति प्राणनाथ


अरे दुनियावालों ! पागल बनकर अमूल्य मानव जीवन बर्बाद मत करो । Oworldly people ! Do not waste the invaluable life as a crazy person .  - Mahamati Prannath  


duniya me sabhi .. Prannath Vani

दुनिया में सभी अपने आप को चतुर समझ कर मनमाना काम करते In this world everyone considers self to be intelligent enough and perfonns obstinately . - महामति प्राणनाथ


प्रेमलक्षणा भक्ति से अक्षरातीत परमात्मा की प्राप्ति करो । With love based devotion , accomplish the bliss of the Supreme Lord .  - Mahamati Prannath


अरे मन ! भूल मत , दुनिया को देखकर खुद को सम्भाल । O intellect ! Do not get lost , keep yourself organised in the world . - महामति प्राणनाथ


Prannath Vani -  

जैसे जलचर जीव जल के बिना नहीं रह सकते , ऐसे ही पतिव्रता अंगना भी पीव ( पति ) के बिना । As an aquatic animal cannot live without water , similar is the case of a virtuous beloved soul without her lover . - Mahamati Prannath


असत्य सत्य तक नहीं पहुँच सकता , इसलिए सत्य को धारण करो । The falseness cannot approach the truth : therefore try to follow the path of reality . - महामति प्राणनाथ


विकार को छोड़कर सदा निर्विकार बनो । Renounce the perversions and always remain blemishless . - Mahamati Prannath


स्वप्न की सृष्टि स्वप्न में रहती है , जागृत आत्मा स्वप्न में नहीं भूलती । The world of a dream is confined within its own domain , an awakened soul docs not get lost in the delusion . - महामति प्राणनाथ


जिससे तुमने संबंध जोड़ा , वह एक दिन आकर मिलेगा । With whom you have attached yourself , one day he is going to unite with you . - Mahamati Prannath


मन को दृढ़ कर सामर्थ्यवान परमात्मा श्री कृष्ण की प्राप्ति करो । Be finn in your mind to attain the bliss of almighty Lord Krishna . - महामति प्राणनाथ  


Parmatma Ke Bhakti ... प्राणनाथ वाणी

परमात्मा के भक्ति - रस में मग्न व्यक्ति गाना नहीं गा सकता । A person deeply engaged in devotion of the Lord cannot perform the act of singing . - Mahamati Prannath


भक्ति मार्ग में स्थूल , सूक्ष्म , कारण , महाकारण दशा से ऊपर उठना होगा । On the path of true devotion , one has to raise himself above the gross , subtle , causal and supra causal stages . - महामति प्राणनाथ


हे साधको ! खोजो , खोजने से ही सद्गुरु तथा परमात्मा मिलेंगे । O devotees ! Search and probe further , then only the true spiritual guide ( sadguru ) and Supreme Lord will be accomplished .  - Mahamati Prannath


गुण , अंग , इन्द्रियों के वशीभूत भक्त परमात्मा को नहीं पा सकते । Devotees , who are performing under the influence of three virtues , physi cal and sensual faculties , cannot attain the Lord .  - महामति प्राणनाथ  


Prannath Vani -  

आडम्बरी , वेशधारी एवं अहंकारी साधु सद्गुरु नहीं हो सकता । An ostentatius . in saintly robes and cgoistic hermit cannot be a true spiritual guide . - Mahamati Prannath


गोविन्द के गुण गाकर दान माँगनेवालों को धिक्कार है । Those who seek alms by singing praises of gods should be contempted .  - महामति प्राणनाथ  


Pet Bharne ke liye .. Prannath Vani  

पेट भरने के लिए भगवान को बेचना यमपुरी जाने का साधन है । Earning livelihood by selling the name of Almighty is the medium for going to the hell . - Mahamati Prannath


जो हृदय से निर्मल हैं , बाहर दिखावा नहीं करता , वहीं परब्रह्म को पा सकता है । One who has pure heart . is not outwardy showy , only he can accom plish the Lord .  - महामति प्राणनाथ


लोग परमात्मा को शून्य , निराकार , निरंजन कहते हैं , पर वे सच्चिदानन्द स्वरूप हैं । People call the Lord as Void ( Shunya ) , Formless ( Nirakar ) and Faultless ( Niranjan ) , but, He is the combined form of truth , divinity and pleasure . - Mahamati Prannath


Prannath Vani -  

हम दूध , पानी का निर्णय कर , ब्रह्म का बोध कराते हैं । By enabling to distinguish between milk and water , I manifest percep tion of the Lord . - महामति प्राणनाथ


आत्मा , परात्मा तथा परमात्मा को भिन्न - भिन्न रूप से जानो । Understand the different forms of ordinary soul , supreme soul and the Lord Supreme . - Mahamati Prannath


समझदारी के बिना परमधाम का सुख नहीं मिल सकता । Without wisdom the pleasures of Abode cannot be achieved . - महामति प्राणनाथ  


Paramhans ke bina maya ... प्राणनाथ वाणी

परमहंस के बिना माया और ब्रह्म का निर्णय और कोई नहीं कर सकता । Except a supreme soul no one can resolve between this deceptive world and the Eternal Lord . - Mahamati Prannath


पुराण के बिना प्रकाश नहीं होता , शास्त्र प्रमाण के बिना ब्रह्मबोध नहीं होता । Without the ancient mythology ( Puranas ) the divine light do not become observable and neither the perception of the Lord without the support of scriptures .  - महामति प्राणनाथ


Prannath Vani -  

प्रेमलक्षणा भक्ति द्वारा गोपियों ने गोवत्सपद समान भवसागर को पार किया । With beloveds like devotion the milkmaids could cross over the occan of deceptive world just like an imprint of calf's feet .  - Mahamati Prannath


कबीर ने वैकुण्ठ , शून्य , निराकार से परे प्रेम के सहारे परब्रह्म को पाया । Kabir realised the Lord , who is beyond heavens , void ( Shunya ) and formless ( Nirakar ) ; hy means of love .  - महामति प्राणनाथ


सूरदास ने भी स्वयं को पतित कहा , महामति पतितों के शिरोमणि हैं । Surdas pronounced himself to be a down - trodden : Mahamati is the chief of the so - called outcastes . - Mahamati Prannath


Prannath Vani -  

वशिष्ठ ने मोक्ष की सात भूमिकाएँ बताई , परमधाम उनसे भी परे है । Vashishtha unfolded seven stages of attaining liberation Supreme Abode ( Paramdham ) is beyond all of them . - महामति प्राणनाथ


वल्लभाचार्य बड़े भाग्यशाली हैं , जिन्होंने भागवत का मर्म खोला । Vallabhacharya is very blissful ; he brought out the secret meanings of Bhagawat .  - Mahamati Prannath


हे जीव ! शरीर के साथ ज्यादा स्नेह मत रखो । यह भूलवनी का भ्रम है । O soul ! Donot get too much attached with physical body , it is a laby rinth of deception . - महामति प्राणनाथ


Prannath Vani -  

शरीर के चौदह अंग दस इन्द्रियाँ , चार अन्त : करण एक दिन तुम्हें निराश करेंगे । Fourteen parts of the human body- ten organs and four types of con sciousness , all are going to disappoint you some day .  - Mahamati Prannath


त्रिगुण और दस इन्द्रियाँ विषयों की तरफ़ ही ले जाती हैं । Three attributes and ten organs , all lead towards worldly pleasures . - महामति प्राणनाथ


जीवन के इस अवसर को मत भूलो , यह अखण्ड परमधाम का सुख देनेवाला है । Do not overlook this unique oppurtunity of human life ; this is going to provide eternal tranquillity of Supreme Abode . - Mahamati Prannath  


Man, Vachan aur karm se sadguru ... Prannath Vani

मन , वचन और कर्म से सद्गुरु की सेवा कर परमात्मा की प्राप्ति करो । Serve your spiritual master by intellect , words and deeds to realise the Lord .  - महामति प्राणनाथ


जहाँ परब्रह्म परमात्मा रहते हैं , वहाँ तक काल की पहुँच नहीं है । God of death cannot reach the region where the Lord Supreme dwells . - Mahamati Prannath


घर में ही निवृत्त भाव से रहो , अन्तरात्मा में निवास करो । Stay at home but in unattached mode , dwell in your inner soul . - महामति प्राणनाथ


मोहजल में स्नान करते हुए कोरे रहो , स्वप्नवत् संसार में भी जागृत रहो । Take bath in the water of illusion without getting soaked ; keep yourself in awakened state in this dreamy world . - Mahamati Prannath


परमात्मा की कृपा और मेरे कर्म में सत्य और असत्य के समान अंतर है । Bliss of the Lord and my actions differ from each other just like truth and falscncss .  - महामति प्राणनाथ


Prannath Vani -  

हृदय से मोह का नक्शा हटाने पर ही परमात्मा का साक्षात्कार होता है । Removal of the impression of attachment from the heart is true percep tion of the Lord . - Mahamati Prannath


हे वालाजी ! मेरे घर पधारो , अकेले संसार रूपी परदेश में मुझे मत छोड़ो । O my Lord ! Bless my home with your presence , donot leave me alone in worldly foreign region . - महामति प्राणनाथ


सब कुछ मन में है , मन को रिक्त रखो या उसमें परब्रह्म को बिठा लो । Mind contains everything , one may keep it unoccupied or make it seat of the Lord . - Mahamati Prannath


Prannath Vani -  

जीवन के हर क्षण को सत्कर्म में लगा लो , क्योंकि यह शरीर क्षणभंगुर है । Devote every moment of life in virtuous actions , because this life is transitory . - महामति प्राणनाथ


सद्गुरु ने मुझे जगाया है , मैं सारे संसार को जगाऊँगा । My spiritual guru has awakened me ; I will stimulate the whole world . - Mahamati Prannath


ब्रह्मलीला अवतारों की लीला में छुप गई थी , उसे पुनः प्रकट किया गया । The play of divinc souls was overshadowed by the performance of incarnated gods : this was brought to light again . - महामति प्राणनाथ


Prannath Vani -  

हिन्दू , मुसलमान , फिरंगी , यहूदी , बौद्ध तथा जैन , धर्म के नाम पर परस्पर वाद - विवाद न करें । Followers of different faiths - Hindus , Muslims . Christians , Jews , Budhism and Jainism , should not argue with cach other in the name of religion . - Mahamati Prannath


मांसाहार करने पर दया उत्पन्न नहीं होती । Fating non - vegetarian foods does not give rise to feelings of kindness .  - महामति प्राणनाथ


तारतम वाणी में वेद - कतेब सभी के गूढार्थ को स्पष्ट कर दिया है । Tartam Vani has clarified the deep understanding of both Vedic and Kateb scriptures .  - Mahamati Prannath


सर्वत्र एक ही परमात्मा का भजन - गान हो , एक आहार हो । All over the world only one Supreme Lord should be worshipped and one kind of diet ( vegetarian ) be taken . - महामति प्राणनाथ


बैर भाव को छोड़कर सभी प्यार से मिलें और परमात्मा की जय - जयकार करें । Without any enmity all should live amicably and hail the Tord . - Mahamati Prannath


Prannath Vani -  

बाघ ( बलवान ) , बकरी ( निर्बल ) सभी परस्पर मिलकर विचरण करें । All animals , like a lion ( strong ) and a goat ( weak ) , may stroll together peacefully .  - महामति प्राणनाथ


तारतम वाणी ने असत्य को दूर कर सत्य ज्ञान की स्थापना की । Tartam Vani has removed false notions and established the true knowl edge . - Mahamati Prannath


हे राजनेताओ ! धर्म की रक्षा करो , जागो , उठो , अज्ञान को छोड़ो । O political leaders ! Defend the religion , get awakened , rise and leave the ignorance . - महामति प्राणनाथ


तीनों लोक में उत्तम भरतखण्ड है तथा श्रेष्ठ हिन्दू धर्म है । In the three worlds , the Indian region is paramount and Hindu religion is the topmost . - Mahamati Prannath  


Dharm raksha ke liye - Prannath Vani

धर्म रक्षा के लिए जो आगे नहीं आता , उसे शूर वीर नहीं कहा जाता । One who does not come forward to defend the religion is not called a brave . - महामति प्राणनाथ


हे परमात्मा ! अपना प्रेम , दर्द एवं इश्क हमें प्रदान करो । O Lord ! Bless us with your adoration , pain of seperation and love . - Mahamati Prannath


जिनको सेवा की सुधि नहीं , वह सुन्दरसाथ नहीं कहलाता । One who has no interest in serving others is not called a true compan ion ( Sundersath ) . - महामति प्राणनाथ


परा प्रेमलक्षणा भक्ति का मार्ग अत्यन्त सूक्ष्म है । The path of worshipping the supreme divine by love based devotion is very constricted . - Mahamati Prannath


पुरुष भाव से परमात्मा नहीं मिलते , सखी भाव से उन्हें भजो । Masculine convictions donot lead to the Lord , worship Him with feelings of a feminine .  - महामति प्राणनाथ


सत्य वचन कहते हुए हृदय को सन्तोष होता है । By speaking truh , the mind gets sense of contentment . - Mahamati Prannath   



परब्रह्म अक्षरातीत , सत् , चिद् , आनंदस्वरूप हैं , हम उन्हीं की अंगनाएँ Supreme Lord is the form of truth . divinity and source of all pleasures . we all are Ilis spouses . - महामति प्राणनाथ


tum mujhe sharir rup - Prannath Vani

तुम मुझे शरीर रूप में संसार में देख रहे हो , मैं तो परमात्मा के समक्ष हूँ । You are seeing me in the form of a human being ; I am always with the Almighty .  - Mahamati Prannath


ब्रह्मसृष्टि और ब्रह्म की बातें वेद , कतेब दोनों में समान रूप से लिखी The description of supreme souls and the Lord are written similarly in Hemitic and Semitic scriptures . - महामति प्राणनाथ


क्षर , अक्षर से परे अक्षरातीत धाम ही अपना घर है । Beyond the perishable world ( Kshar ) and the abode of imperishable creator ( Akshar ) , Abode of the Supreme I ord ( Akshrateet ) is our home . - Mahamati Prannath


वेद - पुराणों में ब्रह्मसृष्टि को ब्रह्म के समान कहा है । In Vedas and Puranas the spreme souls are considered to be of equal status to the Lord . - महामति प्राणनाथ  


Parmatma ka sukh .. Prannath Vani

परमात्मा का सुख आत्मा को मिलता है , आत्मा का सुख जीव को नहीं मिलता । The soul gets the pleasures from the Lord , but the soul does not pro vide the same comfort to the living beings . - Mahamati Prannath


हृदय निर्मल हुए बिना , कोई परमधाम नहीं पहुंच सकता । Without purification of heart no one can attain the ultimate Abode . - महामति प्राणनाथ


जीव सृष्टि वैकुण्ठ , ईश्वरी सृष्टि अक्षरधाम तथा ब्रह्मसृष्टि अक्षरातीत परमधाम जाते हैं । The ordinary soul goes to the heavens ( baikunth ) , the pure soul reaches abode of lord Akshar and the supreme soul has Supreme Abode as the destination . - Mahamati Prannath  


Shashtron me sab kuch .. Prannath Vani

शास्त्रों में सब कुछ है , पर तुच्छ जीव उसे पा नहीं सकता । All knowledge is available in the scriptures , but miserable living being cannot appreciate it . - महामति प्राणनाथ


अन्त : करण तथा इन्द्रियों के सहारे जीव ने आत्मा को अंधा कर रखा है । Through the faculties of consciousness and organs of the body the liv ing being has blind - lolded the soul . - Mahamati Prannath


अक्षरातीत के महल में प्रेमलीला होती है , परंतु इसकी जानकारी अक्षरब्रह्म को भी नहीं है । The play of love is enacted in the palace of Supreme Lord , but even the imperishable creator lord ( Akshar ) has no awareness of'it . - महामति प्राणनाथ


विश्वास ( ईमान ) एवं प्रेम ( इश्क ) के बिना परमात्मा नहीं मिलते । Without faith and love the Lord cannot attained . - Mahamati Prannath  
 

brahmand ko mukti ..Prannath Vani

ब्रह्माण्ड को मुक्ति देनेवाला निजनाम मंत्र प्रकट हो चुका है । For liberation of entire universe the integral knowledge ( Tartum Munira ) has already appeared . - महामति प्राणनाथ


समय निकलने के बाद पछताने से कोई लाभ नहीं होगा । There is no use in repenting after the time has clapsed . - Mahamati Prannath


यहाँ एक - एक क्षण अमूल्य है , दिन , महीना और वर्ष की तो बात ही क्या । Here every moment is invaluable , what to say of the day , month and year . - महामति प्राणनाथ


हमेशा सेवा को जीवन का लक्ष्य बना लो । Always make sevice to others as the aim of your life . - Mahamati Prannath


जीवन में हार - जीत , मिलना - बिछुड़ना सब परमात्मा के हुकुम से ही होता है । Success and defeat , meeting and separation in life . all happens with the authority of the Lord . - महामति प्राणनाथ  


Krapa ke anurup .. Prannath Vani

कृपा के अनुरूप कर्तव्य करो , कर्तव्य के अनुरूप कृपा होगी । Perform your duties according to I ord's will ; blessings shall pour in as per your deeds . - Mahamati Prannath


कर्तव्य छुपकर नहीं रहता , न ही अंकुर छुपकर रहता है । The performance never remains hidden , neither the sprout stays unno ticed .  - महामति प्राणनाथ


प्राणनाथ वाणी -

परमात्मा आपके सत्य और झूठ कर्म को तराजू में तौलेंगे । God shall be evaluating your good and bad deeds in a balance . - Mahamati Prannath


सुन्दरसाथ जी ! मीठा बोलें और प्रेम में मगन रहें , परमधाम का द्वार स्वतः खुल जाएगा । O my companions ! Make your speech pleasing and remain absorbed in love of the Lord , the doors of the Supreme Abode shall automati cally get opened for you .  - महामति प्राणनाथ  .. 


Maya hame nahi chhodti .. Prannath Vani

माया हमें नहीं छोड़ती , हम भी माया को नहीं छोड़ सकते , यही बंधन है । This delusion does not leave us . neither we keep away from it . this is the attachment .  - Mahamati Prannath


हमारे असंख्य अवगुण होने पर भी परमात्मा गुण ही बरसाते रहते हैं । Despite our innumerable faults . the Lord always showers attributes on us . - महामति प्राणनाथ


परमात्मा के असंख्य गुणों में से एक भी गुण याद आ जाए , तो जीव का कल्याण होगा । If one remembers even a single of countless virtues of the Lord , the living being will get blessed . - Mahamati Prannath


शरीर को कष्ट मत दो , इसे अंत में सुखपूर्वक छोड़ना है । Donot trouble your body , ultimately you have to leave it peacefully . - महामति प्राणनाथ


प्राणनाथ वाणी - 

परमधाम , ब्रज , रास और जागनी - इन चार शब्दों में ही आत्म - जागृति छिपी है । The soul awakening is coverted in these four words i.e. Paramdham , Braj , Raas and Jagani . - Mahamati Prannath


जो सोया है , जागे , जागा हुआ बैठे , बैठा हुआ खड़ा हो जाए तथा जो खड़ा है , वह सत्मार्ग पर चलने लगे । One who is sleeping should wake up the awake may sit down and sitting one must stand up and start moving on the path of truthfulness . - महामति प्राणनाथ


जीवन में तैयारी इस तरह करो , अंग अंग में प्रेम लिए दौड़कर परमधाम जाओ । Prepare yourself in life in such a way that each body part is filled with the Lord's love and you start running to the Supreme Abode . - Mahamati Prannath


सुन्दरसाथ के बीच जितनी घड़ी रहो , उनके चरणरज समान ( विनम्र ) बनकर रहो । You may stay for any duration of time among your companions of the Ahode ; remain compassionate as the dust of their feel . - महामति प्राणनाथ


विनम्रता से ही परमात्मा का प्रेम प्राप्त किया जा सकता है । One can attain Lord's love only by being courteous . - Mahamati Prannath


सुन्दरसाथ में कोई कटु वचन कहे , वह हमें सहन नहीं होगा । If someone says unpleasant words to our companions of Abode , these will not be tolerated . - महामति प्राणनाथ


प्राणनाथ वाणी- 

जितना सुन्दरसाथ में प्रेम होगा , उतना ही मुझे सुख मिलेगा । The content of love , among my fellow companions , shall accordingly provide me comfort . - Mahamati Prannath


साधक की प्रत्यक्ष परीक्षा है कि वे अपना , सुन्दरसाथ का एवं गुरु का दायित्व भी उठाएँ । The companions have their direct evaluation on the basis that they perform dutifully towards owniself . fellow beings and their spiritual guide .  - महामति प्राणनाथ


धर्म का राज्य विनम्रता , शांति एवं धैर्य से ही पाया जाता है । The kingdom of religion is realised by humility , peacefulness and preservance . - Mahamati Prannath


पहले अपना दिल देकर औरों का दिल जीता जाता है । The hearts of others is conquered by first offering your own to them . - महामति प्राणनाथ


विजयाभिनन्द निष्कलंक बुधजी सबकी आसुरी बुद्धि मिटाकर मुक्ति Vijayabhinand Budh Nishakalank ( Mahamati Prannath ) shall provide liberation to everyone by cradicating the devilish thinking .  - Mahamati Prannath


प्राणनाथ वाणी- 

ईमान , प्रेम , कृतज्ञता , विनम्रता एवं धैर्य से ही परमात्मा को पाया जाता है । The Lord can be comprehended by faith , love . gratefulness , humility and preservence . - महामति प्राणनाथ


साधु - सन्तों को मन में प्रतिष्ठा का भाव नहीं रखना चाहिए । The saints and hermits should not maintain the feeling of reputation in their minds . - Mahamati Prannath


उस मान - प्रतिष्ठा को जुते मारो , जो परमात्मा के ध्यान में बाधा डालती है । Rebuke the honour and reputation which becomes obstacle in devo tion of the Lord . - महामति प्राणनाथ


संसार का भला - बुरा छोड़कर परमधाम का मार्ग पकड़ो । Leave hehind right and detrimental matters and proceed on the path to Eternal Abode . - Mahamati Prannath


हृदय की हताशा को छोड़ो , यह नुकसान पहुंचाने वाली है । Ignore the dejection of heart , this is harmful . - महामति प्राणनाथ


ब्रह्मसृष्टि के दिल में एक ही बात होती है , जो वह परमात्मा के समक्ष प्रकट करती है । The supreme soul is concerned only about one matter which she expresses before Supreme Lord .  - Mahamati Prannath


दो तरह की बातें दिल में रखना दुनियावालों की रीत है । It is customary for common people to have two kinds of thoughts in their mind . - महामति प्राणनाथ


प्राणनाथ वाणी -  

आपस में लड़ाई करके हम परमधाम के सुन्दरसाथ हैं , ऐसा कहना जुल्म है । Quarreling among ourselves and then claiming to be souls of Supreme Abode , is an offence . - Mahamati Prannath


बाहर सेवा - भाव दिखाकर अन्दर से कुकर्म करना ब्रह्मसृष्टि का लक्षण नहीं है । Outwardly posing as devoted to serving others and internally being immoral , is not the gesture of a divine soul . - महामति प्राणनाथ


शरीर - शुद्धि हेतु अनेक आचार - विचार करो , पर यह शुद्ध नहीं होगा , अत : मन को शुद्ध करो । For cleaning and purifying the physical body you may adopt several means and ways , but it will not become righteous , therefore purify the mind . - Mahamati Prannath


रात - दिन प्रेमपूर्वक परमात्मा के चरणकमल के स्मरण से ही तुम निर्मल बनोगे । By adoring Lord's sacred feet , throughout the day and night , you will become pure . - महामति प्राणनाथ


परमात्मा के भजन के बिना शरीर नरक के समान दूषित है । Without devotion to the Lord this human body is as soiled as hell . - Mahamati Prannath


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